द्वितीय अखिल भारतीय आरोग्य सम्मेलन–2026 में स्वस्थ भारत के निर्माण पर हुआ राष्ट्रीय चिंतन
नई दिल्ली, 30 जून 2026।
आरोग्य सृजन न्यास के तत्वावधान में द्वितीय अखिल भारतीय आरोग्य सम्मेलन–2026 का सफल एवं गरिमामय आयोजन नई दिल्ली स्थित इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में सम्पन्न हुआ। सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से आए प्रतिष्ठित चिकित्सकों, योगाचार्यों, आयुर्वेदाचार्यों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों एवं पत्रकारों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए स्वास्थ्य, योग, भारतीय जीवन-पद्धति एवं जनकल्याण से जुड़े विविध विषयों पर विचार-विमर्श किया।

सम्मेलन की विशिष्ट अतिथि डॉ. शशि यादव, प्रख्यात समाजसेविका एवं राजनेत्री ने अपने प्रेरणादायी संबोधन में कहा कि उत्तम स्वास्थ्य केवल शरीर के स्वस्थ रहने तक सीमित नहीं है, बल्कि तन, मन और आत्मा के समग्र संतुलन का परिणाम है। उन्होंने कहा कि आज की भागदौड़ भरी जीवनशैली में तनाव, असंतुलित खान-पान और अनियमित दिनचर्या अनेक रोगों का कारण बन रहे हैं। यदि व्यक्ति अपने दैनिक जीवन में संतुलित एवं पौष्टिक आहार, नियमित योग एवं ध्यान, सकारात्मक चिंतन, पर्याप्त विश्राम तथा सेवा एवं करुणा की भावना को अपनाए, तो वह शारीरिक, मानसिक एवं आध्यात्मिक रूप से स्वस्थ रह सकता है। उन्होंने कहा कि आत्मिक शांति ही वास्तविक स्वास्थ्य का आधार है और स्वस्थ व्यक्ति ही स्वस्थ परिवार, स्वस्थ समाज तथा सशक्त राष्ट्र का निर्माण करता है।

उन्होंने विशेष रूप से महिलाओं, युवाओं तथा समाज के प्रत्येक वर्ग से स्वास्थ्य के प्रति जागरूक रहने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वास्थ्य केवल व्यक्तिगत विषय नहीं, बल्कि सामाजिक उत्तरदायित्व भी है। उनके प्रेरणादायी विचारों ने उपस्थित जनसमूह को स्वस्थ एवं संतुलित जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
इस अवसर पर स्वास्थ्य जागरूकता, सामाजिक सेवा एवं जनकल्याण के क्षेत्र में उनके उल्लेखनीय एवं सराहनीय योगदान के लिए डॉ. शशि यादव को प्रतिष्ठित “आरोग्य सेवा सम्मान” से सम्मानित किया गया। सम्मान प्राप्त करते हुए उन्होंने इस सम्मान को समाज के प्रत्येक स्वास्थ्यकर्मी, चिकित्सक एवं जनसेवक को समर्पित बताया तथा कहा कि यह सम्मान उन्हें समाज की और अधिक सेवा करने की प्रेरणा देगा।

सम्मेलन के विशिष्ट अतिथि डॉ. भूप सिंह यादव, सदस्य, हिंदी सलाहकार समिति, रक्षा मंत्रालय, भारत सरकार ने अपने उद्बोधन में कहा कि “स्वस्थ भारत ही सशक्त भारत की आधारशिला है।” उन्होंने कहा कि किसी भी राष्ट्र की प्रगति उसके नागरिकों के स्वास्थ्य, अनुशासन और जागरूकता पर निर्भर करती है। उन्होंने सभी नागरिकों से नियमित व्यायाम, योग, संतुलित आहार एवं नशामुक्त जीवनशैली अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने यह भी कहा कि स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता को देश के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने में भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिंदी की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने आह्वान किया कि प्रत्येक नागरिक स्वयं स्वस्थ रहे और अपने परिवार एवं समाज को भी स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाए, तभी विकसित एवं सशक्त भारत का सपना साकार होगा।
विशिष्ट अतिथि श्री अनिल कुमार, अपर न्यायाधीश, प्रयागराज ने अपने संबोधन में भारतीय संस्कृति और स्वास्थ्य के अटूट संबंध पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन संस्कृति सदैव संयम, सात्विकता, योग, आयुर्वेद, स्वच्छता और प्रकृति के संरक्षण का संदेश देती रही है। भारतीय जीवन-दर्शन में स्वास्थ्य को धर्म, कर्तव्य और जीवन-मूल्यों से जोड़ा गया है। उन्होंने कहा कि यदि हम अपनी सांस्कृतिक परंपराओं, नैतिक मूल्यों एवं स्वस्थ जीवनशैली को पुनः अपनाएँ, तो अनेक शारीरिक एवं मानसिक रोगों से बचा जा सकता है। उन्होंने युवाओं से भारतीय संस्कृति, संस्कारों एवं स्वास्थ्यपरक जीवनशैली को अपनाने का आह्वान करते हुए कहा कि स्वस्थ नागरिक ही राष्ट्र की सबसे बड़ी पूंजी होते हैं।

सम्मेलन में देशभर से आए चिकित्सकों, योगाचार्यों, आयुर्वेदाचार्यों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों एवं पत्रकारों ने स्वास्थ्य जागरूकता, योग, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा तथा स्वस्थ जीवनशैली को जन-जन तक पहुँचाने का सामूहिक संकल्प व्यक्त किया।
कार्यक्रम के अंत में श्री उमेश प्रसाद सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए सभी विशिष्ट अतिथियों, सम्मानित चिकित्सकों, योगाचार्यों, आयुर्वेदाचार्यों, शिक्षाविदों, समाजसेवियों, पत्रकारों, प्रतिभागियों तथा आयोजन में सहयोग प्रदान करने वाले सभी व्यक्तियों एवं संस्थाओं के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सम्मेलन में व्यक्त विचार देश में स्वास्थ्य जागरूकता के व्यापक अभियान को नई दिशा प्रदान करेंगे तथा “स्वस्थ भारत–सशक्त भारत” के राष्ट्रीय संकल्प को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएँगे।
कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान एवं “स्वस्थ भारत, समृद्ध भारत” के सामूहिक संकल्प के साथ हुआ।



