जंतर मंतर प्रोटेस्ट में बच्चों की भाषा पर सवाल,मर्यादा बनाए रखना जरूरी, जिम्मेदारो को मिले कड़ी सजा: समाज सेविका अंकिता राजपूत
NEET पेपर लीक के विरोध में जंतर मंतर पर हुए प्रदर्शन में छात्रों की नाराजगी जायज है। सालों की मेहनत बर्बाद हो जाए तो दर्द होना लाज़मी है।
लेकिन बच्चों की आवाज़ बुलंद हो, पर भाषा मर्यादित रहे।
शिक्षाविदों और अभिभावकों का मानना है कि विरोध का अधिकार सबको है, लेकिन आंदोलन की मर्यादा और अनुशासन भी उतना ही जरूरी है। बच्चों के मुँह से अमर्यादित शब्दावली सुनकर समाज में गलत संदेश जा रहा है।
हमारा विरोध सिस्टम से है, संस्कारों से नहीं। कुछ बच्चों की अमर्यादित भाषा शैली ने इस आंदोलन की गंभीरता को कमज़ोर कर दिया है। बच्चों को आंदोलन का तरीका सिखाना होगा ताकि उनकी आवाज सुनी भी जाए और सम्मान भी मिले।
प्रोटेस्ट का मकसद सिस्टम को सुधारना है, समाज को गलत संदेश देना नहीं।

हमें अपने बच्चों को सिखाना होगा:
विरोध करें, पर संस्कारों के साथ।
आवाज़ उठाएं, पर मर्यादा में रहकर।
क्योंकि जिस भाषा से हम लड़ेंगे, उसी भाषा से कल हमारा भारत बनेगा।



