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गौतम बुद्ध नगर में मजदूरों की सामूहिक गिरफ्तारी पर AILU, SFI व DYFI की तथ्य-खोज रिपोर्ट सार्वजनिकस्थान: प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली

गौतम बुद्ध नगर में मजदूरों की सामूहिक गिरफ्तारी पर AILU, SFI व DYFI की तथ्य-खोज रिपोर्ट सार्वजनिक
स्थान: प्रेस क्लब ऑफ इंडिया, नई दिल्ली

ऑल इंडिया लॉयर्स यूनियन (AILU), स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) और डेमोक्रेटिक यूथ फेडरेशन ऑफ इंडिया (DYFI) की संयुक्त तथ्य-खोज समिति ने गौतम बुद्ध नगर में 13-17 अप्रैल 2026 के दौरान हुई मजदूरों की सामूहिक गिरफ्तारी पर अपनी रिपोर्ट आज प्रेस क्लब, नई दिल्ली में सार्वजनिक की।
रिपोर्ट के प्रमुख निष्कर्ष

  1. विरोध का कारण:
    13-14 अप्रैल को नोएडा के औद्योगिक क्षेत्रों में 82 स्थानों पर कम वेतन, गैस संकट, महंगाई और शोषणकारी कार्य परिस्थितियों के खिलाफ प्रदर्शन हुए। यूपी सरकार द्वारा संवाद न करने के कारण कुछ जगहों पर प्रदर्शन हिंसक हुए।
  2. गिरफ्तारी का पैमाना:
  • पुलिस के आधिकारिक आंकड़े: 396 हिरासत • प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार कासना में हिरासत: 800+ लोग, जिनमें ∼300 नाबालिग • अब तक हिरासत में लिए गए लोगों की कोई आधिकारिक सूची जारी नहीं की गई है।
  1. मनमानी गिरफ्तारी के आरोप:
    18 अप्रैल को प्रतिनिधिमंडल ने कासना में परिजनों से मुलाकात की। करीब 100 लोगों से बातचीत में सामने आया:
  • 13-14 अप्रैल: ट्यूशन से लौटते बच्चे, बाजार में सामान खरीदते लोग, भोजन कर रहे निर्माण मजदूर, दवा लेने गए नागरिकों को सादे कपड़ों/वर्दीधारी पुलिस ने उठाया। • 15-17 अप्रैल: कई श्रमिकों को कंपनी प्रबंधन/HR के कहने पर कार्यस्थल से हिरासत में लिया गया। • गिरफ्तारी के समय न्यायिक आदेश की जानकारी नहीं।
  1. कानूनी उल्लंघन:
  • अधिकांश लोगों को Cr.P.C. की धारा 151 के तहत 24 घंटे से अधिक हिरासत में रखा गया, जो गैरकानूनी है। • 4-5 दिन बाद भी मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश नहीं किया गया, गिरफ्तारी मेमो नहीं दिया गया। • परिजनों को ठिकाने या गिरफ्तारी के आधार की सूचना नहीं। • परिजनों से जमानत के नाम पर ₹5000+ वसूले गए, जबकि पुलिस “बिना जमानत रिहाई” की बात कह रही है। • कानूनी सहायता देने आई टीम को पुलिस ने बाधित किया।
  1. पुलिस का बयान:
    कासना थाने के अधिकारियों ने टीम को बताया कि “कई लोगों को बिना किसी विशेष कारण के उठाया गया है और उन्हें बिना किसी भुगतान के रिहा कर दिया जाएगा।”
    समिति की प्रमुख मांगें
  2. 1. तत्काल रिहाई: सभी अवैध हिरासत में लिए गए लोगों, विशेषकर नाबालिगों को तुरंत रिहा किया जाए।
  3. 2. सूची सार्वजनिक हो: हिरासत में लिए गए सभी लोगों की नामवार सूची तत्काल जारी की जाए।
  4. 3. जवाबदेही तय हो: गैरकानूनी हिरासत, परिजनों से वसूली और कानूनी प्रक्रिया के उल्लंघन के लिए दोषी पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई हो।
  5. 4. मजदूरों की मांग: एनसीआर के सभी मजदूरों के लिए ₹26,000 न्यूनतम वेतन लागू किया जाए। वर्तमान वेतन संशोधन अपर्याप्त हैं।
  6. 5. संवैधानिक अधिकार: शांतिपूर्ण प्रदर्शन के अधिकार और कानूनी सहायता के अधिकार का सम्मान हो। प्रदर्शन को मौलिक अधिकारों के हनन का बहाना न बनाया जाए।
    समिति का बयान:
    “आज नोएडा में जो हो रहा है, वह सिर्फ मजदूरों पर नहीं, हमारे संविधान और मौलिक अधिकारों पर सीधा हमला है। लोगों को बिना कानूनी प्रक्रिया के उठाना सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों का गंभीर उल्लंघन है।”

जारीकर्ता:
रिकता, उपाध्यक्ष, DYFI दिल्ली | +91 99711 45282
अद्रिजा, सचिवमंडल सदस्य, AILU दिल्ली | +91 99535 70772
अचिंत्या, SFI दिल्ली | +91 76193 61118

नोट: तथ्य-खोज दल 18 अप्रैल 2026 को कासना में बंदियों के परिजनों से मिला और कानूनी सहायता प्रदान की। रिपोर्ट पूर्ण विवरण के साथ उपलब्ध है।

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