यमुना-हरनंदी डूब क्षेत्र में जिस तरह से तेजी से अवैध निर्माण बढ़ रहा है, उससे नदियों के अस्तित्व को खतरा पैदा हो रहा है। इसकी गंभीरता को देखते हुए 20 जून तक बड़े स्तर पर अभियान चलाकर सभी अवैध निर्ताण, पक्के निर्माण को ध्वस्त करने का निर्देश नोएडा प्राधिकरण सीईओ कृष्णा करुणेश ने दिया है।
नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करुणेश का कड़ा रुख; लापरवाही बरतने वाले वर्क सर्किल अधिकारियों को दी क्षेत्र से हटाए जाने की चेतावनी
👉 विशेष संवाददाता, नोएडा। यमुना और हरनंदी (हिंडन) नदी के वजूद को बचाने और आगामी मानसून में बाढ़ के खतरे से निपटने के लिए नोएडा प्राधिकरण ने अब तक का सबसे बड़ा रुख अख्तियार किया है। प्राधिकरण के नवनियुक्त सीईओ कृष्णा करुणेश ने दोनों नदियों के अधिसूचित डूब क्षेत्र (फ्लड ज़ोन) में हो रहे अवैध निर्माणों को पूरी तरह से नेस्तनाबूद करने का अल्टीमेटम जारी कर दिया है।

सीईओ के सख्त निर्देशों के मुताबिक, अगले पांच दिनों यानी 20 जून तक डूब क्षेत्र में बड़े स्तर पर ध्वस्तीकरण अभियान चलाकर सभी अवैध पक्के मकान, आलीशान फार्म हाउस, रिसॉर्ट और स्विमिंग पूल को ध्वस्त कर दिया जाएगा।
इस महाअभियान को लेकर प्रशासनिक महकमे में हड़कंप मच गया है, क्योंकि सीईओ ने साफ कर दिया है कि यदि तय समय सीमा के भीतर अवैध निर्माण नहीं हटाए गए, तो संबंधित वर्क सर्किल के अधिकारियों पर सीधे गाज गिरेगी और उन्हें उनके क्षेत्र से हटा दिया जाएगा।
नोएडा प्राधिकरण के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (सीईओ) कृष्णा करुणेश ने समीक्षा बैठक के दौरान अधिकारियों को कड़ी चेतावनी जारी की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यमुना और हरनंदी का डूब क्षेत्र प्राधिकरण का पूरी तरह से अधिसूचित क्षेत्र (Notified Area) है,
जहाँ किसी भी प्रकार का स्थायी या अस्थायी निर्माण पूरी तरह से गैरकानूनी है।
नदी के डूब क्षेत्र में एक इंच भी अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
पिछले कुछ वर्षों में भू-माफियाओं ने यहाँ अवैध रूप से करोड़ों रुपये के फार्म हाउस, आलीशान बंगले और स्विमिंग पूल खड़े कर दिए हैं। सभी वर्क सर्किल अधिकारी चार दिन के भीतर अपने-अपने क्षेत्रों में निर्माणाधीन और पहले से बने अवैध ढांचों की पहचान कर उन्हें ध्वस्त करना सुनिश्चित करें। प्राधिकरण द्वारा इस अचानक और आक्रामक कार्रवाई के पीछे सबसे बड़ी वजह आगामी मानसून और पिछले वर्षों का कड़वा अनुभव है।
पिछले सालों में जब यमुना और हिंडन नदियों का जलस्तर बढ़ा, तो डूब क्षेत्र में अवैध रूप से बसी कॉलोनियों और फार्म हाउसों में पानी भर गया था। उस दौरान प्रशासन, एनडीआरएफ (NDRF) और स्थानीय पुलिस को हजारों लोगों को बाहर निकालने के लिए भारी मशक्कत करनी पड़ी थी। बाढ़ के समय रेस्क्यू ऑपरेशन में आने वाली दिक्कतों और जान-माल के खतरे को देखते हुए, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ‘सुशासन व सुरक्षा’ मॉडल के तहत मानसून से ठीक पहले नदियों के प्राकृतिक प्रवाह को बहाल करने के लिए यह बुलडोजर एक्शन शुरू किया गया है।
प्राधिकरण की टीमों ने सर्वे कर उन संवेदनशील इलाकों की सूची तैयार कर ली है जहाँ सबसे ज्यादा अवैध अतिक्रमण हुआ है। इन क्षेत्रों में भारी पुलिस बल और पीएसी की मौजूदगी में पीला पंजा गर्जने को तैयार है: यमुना नदी क्षेत्र | सेक्टर-94, 124, 125, 127, 128, 131, 133, 134, 135, 168 और सेक्टर-150 के आसपास के तटीय इलाके। हिंडन (हरनंदी) क्षेत्र | छिजारसी (प्रवेश द्वार), सेक्टर-63ए, बेहलोलपुर, शाहदरा, सुथियाना, गढ़ी चौखंडी, सेक्टर-123, 118, 115, 143, 143ए, 148 और सेक्टर-150 (मोमनाथल संगम)। |
विशेष रूप से सेक्टर-150 का मोमनाथल इलाका, जहाँ यमुना और हिंडन नदियों का संगम होता है, भू-माफियाओं के निशाने पर रहा है। हाल ही में यहाँ प्राधिकरण ने करीब 40 हजार वर्गमीटर व्यावसायिक जमीन को मुक्त कराया था, जिसकी कीमत 6 करोड़ से अधिक थी। अब इसके बचे हुए हिस्सों पर भी पूरी तरह से सफाए की तैयारी है। नोएडा में चल रही इस बड़ी कार्रवाई का एक सिरा देश की राजधानी और केंद्र सरकार के प्रयासों से भी जुड़ा है। हाल ही में गृह मंत्रालय ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते हुए यमुना नदी के संरक्षण, प्रदूषण मुक्ति और पुनर्जीवीकरण के लिए एक उच्च स्तरीय समिति (High-Level Committee) का गठन किया है।
नोएडा में यमुना की लंबाई करीब 13 किलोमीटर से अधिक है और इसका डूब क्षेत्र लगभग 3,000 हेक्टेयर में फैला है। इस मास्टर प्लान के तहत इसे ‘ग्रीन बेल्ट’ यानी हरित क्षेत्र घोषित किया गया है। अब जब गृह मंत्रालय इस पर नजर रख रहा है, तो नोएडा प्राधिकरण ने अपनी कार्ययोजना को और तेज कर दिया है। प्राधिकरण के एसीईओ सतीश पाल को इस केंद्रीय समिति की बैठकों के लिए नोडल प्रभारी नामित किया गया है, जो अतिक्रमण की स्थिति और ध्वस्तीकरण की दैनिक रिपोर्ट तैयार कर रहे हैं। इस अभियान के साथ ही नोएडा प्राधिकरण ने आम जनता और निवेशकों के लिए एक गंभीर एडवाइजरी जारी की है। सोशल मीडिया और विज्ञापनों के जरिए लोगों को आगाह किया गया है कि वे भू-माफियाओं और फर्जी कॉलोनाइजरों के झांसे में न आएं।

क्योंकि प्राधिकरण का बुलडोजर बिना किसी नोटिस के इन्हें ध्वस्त करने की शक्ति रखता है। अगले 120 घंटे नोएडा के डूब क्षेत्र के इतिहास में बेहद निर्णायक होने वाले हैं। अधिकारियों की कुर्सी दांव पर होने के कारण इस बार कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि धरातल पर करोड़ों के अवैध निर्माण ढहते नजर आएंगे।
👉डूब क्षेत्र की जमीनों की रजिस्ट्री या नोटरी स्टांप पर खरीद-बिक्री पूरी तरह अवैध है।
👉यहाँ बिना नक्शा पास कराए बनाए गए किसी भी निर्माण को वैध नहीं माना जाएगा।
👉सस्ते प्लॉट, ‘नेचर-लिविंग’ फार्म हाउस या रिसॉर्ट के नाम पर अपनी जीवनभर की पूंजी डूब क्षेत्र में निवेश न करें,



