देश में हाल के दिनों में इंडक्शन कुकटॉप की बिक्री में अचानक बड़ी बढ़ोतरी देखने को मिली है। ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म अमेज़न पर जारी आंकड़ों के अनुसार केवल एक दिन में लगभग 1.34 लाख से अधिक इंडक्शन कुकटॉप बिक गए। यह आंकड़ा इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि सामान्य परिस्थितियों में पूरे महीने में लगभग 1.80 लाख इंडक्शन चूल्हे बिकते हैं।

पिछले चार दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो अमेज़न के साथ-साथ अन्य ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म को मिलाकर करीब 5 लाख से ज्यादा इंडक्शन कुकटॉप ऑनलाइन बिक चुके हैं। इससे यह सवाल उठ रहा है कि क्या देश में गैस सिलेंडर की उपलब्धता या महंगाई के कारण लोग तेजी से वैकल्पिक साधनों की ओर जा रहे हैं।

इसी बीच देश में विकास और आत्मनिर्भरता को लेकर भी बहस तेज हो गई है। सरकार की ओर से लगातार विकसित भारत और विश्वगुरु बनने की बात कही जा रही है, लेकिन आम जनता का एक वर्ग यह सवाल उठा रहा है कि जब तक रोजगार, शिक्षा और शुद्ध पानी,शुद्ध हवा एवं स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति मजबूत नहीं होती, तब तक विकास के दावे अधूरे ही माने जाएंगे।

आलोचकों का यह भी कहना है कि देश के कई बड़े औद्योगिक घरानों को सरकारों द्वारा सस्ती दरों पर जमीन और संसाधन दिए गए, लेकिन इसके बदले देश को कितने ऐसे बड़े तकनीकी प्लेटफॉर्म मिले जो भारत को वास्तव में डिजिटल रूप से आत्मनिर्भर बना सकें। आज भी इंटरनेट, सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के क्षेत्र में विदेशी कंपनियों का दबदबा बना हुआ है।
राजनीतिक व्यवस्था को लेकर भी चर्चा हो रही है। कई लोग मानते हैं कि आज भी देश की राजनीति जाति समीकरण और आरक्षण की राजनीति के इर्द-गिर्द घूमती दिखाई देती है। वहीं मध्यम वर्ग का एक बड़ा हिस्सा यह महसूस करता है कि सबसे अधिक टैक्स देने के बावजूद उसी पर शिक्षा, निजी अस्पतालों, हवा,पानी,टोल टैक्स और अन्य सेवाओं का आर्थिक बोझ लगातार बढ़ता जा रहा है।
शिक्षा क्षेत्र में भी सवाल उठ रहे हैं। कई लोगों का मानना है कि विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा से जुड़े निर्णयों में UGC (University Grants Commission) की नीतियों और व्यवस्थाओं पर अधिक पारदर्शिता और सुधार की आवश्यकता है, ताकि शिक्षा व्यवस्था मजबूत हो सके और युवाओं को बेहतर अवसर मिल सकें।
इन सभी मुद्दों के बीच आम नागरिक यही उम्मीद कर रहा है कि सरकार विकास के साथ-साथ रोजमर्रा की समस्याओं—महंगाई, रोजगार, शिक्षा, शुद्ध हवा पानी और स्वास्थ्य—पर भी गंभीरता से ध्यान दे, ताकि देश की प्रगति का लाभ हर वर्ग तक समान रूप से पहुंच सके।



