स्मार्ट सिटी से दुखदाई सिटी की ओर ग्रेटर नोएडा वेस्ट : नरेश नौटियाल
ग्रेटर नोएडा वेस्ट में लगातार गहराते पार्किंग संकट, सड़क अतिक्रमण और अव्यवस्थित शहरी विकास को लेकर समाजसेवी नरेश नौटियाल (ट्रस्टी, सनातन न्यास एवं पूर्व सांसद प्रत्याशी, गौतम बुद्ध नगर) ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं। उन्होंने कहा कि आज ग्रेटर नोएडा वेस्ट की स्थिति किसी एक संस्था की विफलता नहीं, बल्कि बिल्डर, प्राधिकरण, प्रशासन और AOA—चारों की सामूहिक जिम्मेदारी से उपजी समस्या है।

नरेश नौटियाल के अनुसार, सोसाइटियों में आज जो पार्किंग संकट दिखाई दे रहा है, उसकी जड़ बिल्डरों द्वारा बड़े पैमाने पर कॉमन एरिया एवं पार्किंग एरिया को अवैध रूप से बेच देना और गेस्ट पार्किंग की अनदेखी है। उन्होंने कहा कि अधिकांश परियोजनाओं में पार्किंग को सुविधा के बजाय व्यापार बना दिया गया, जिससे निवासियों और आगंतुकों के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था ही नहीं छोड़ी गई।
उन्होंने कहा कि स्थिति इतनी विकट हो चुकी है कि अब सड़कें और ग्रीन बेल्ट भी सुरक्षित नहीं बची हैं। कई स्थानों पर खुलेआम यह कहा जा रहा है कि विज़िटर वाहन सड़क पर या ग्रीन बेल्ट में खड़े किए जाएँ। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि पर्यावरण और नागरिक सुरक्षा के लिए भी गंभीर खतरा है।
नरेश नौटियाल ने याद दिलाया कि जब ग्रेटर नोएडा वेस्ट को “स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट” नोएडा वेस्ट के रूप में प्रचारित किया गया था, तब इसका मूल उद्देश्य सड़कों से अतिक्रमण समाप्त करना, पार्किंग माफियाओं पर रोक लगाना और सभी सुविधाओं द्वारा सुनियोजित शहरी विकास सुनिश्चित करना था। लेकिन आज हालात इसके ठीक उलट हैं और यह क्षेत्र एक “दुखदाई सिटी” में परिवर्तित होता जा रहा है।
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में पब्लिक ट्रांसपोर्ट शून्य से -1 बराबर है, जिससे नागरिकों को पूरी तरह निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ता है। एक-एक परिवार में दो-दो और तीन-तीन गाड़ियाँ होना अब सामान्य होता जा रहा है, जबकि यह क्षेत्र अभी 50 प्रतिशत भी पूरी तरह आबाद नहीं हुआ है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब यह इलाका 100 प्रतिशत आबाद होगा, तब क्या मौजूदा सड़कें और पार्किंग व्यवस्था इस दबाव को संभाल पाएंगी?
नरेश नौटियाल ने सरकार, प्राधिकरण और बिल्डरों से सीधा प्रश्न करते हुए कहा कि फ्लैट खरीदारों को जिन सपनों के आधार पर घर बेचे गए थे—मेट्रो कनेक्टिविटी, बस,पर्याप्त पार्किंग, क्लब, स्विमिंग पूल, खेल मैदान और हरित क्षेत्र, पार्क —क्या वे सुविधाएँ वास्तव में आज सोसाइटियों में मौजूद हैं? यदि नहीं, तो इसके लिए जवाबदेह कौन है?
उन्होंने कहा कि आज नागरिकों को संस्थाओं में बाँट दिया गया है, जिससे सामूहिक आवाज कमजोर हो गई है। AOA को लेकर उन्होंने कहा कि यह केवल 10–20 लोगों तक सीमित संगठन बनकर रह गया है, जो निवासियों की मूलभूत समस्याओं के समाधान के बजाय नेतृत्व, पद और चुनावी राजनीति में अधिक उलझा हुआ है। आश्चर्य की बात यह है कि 11 महीने बीत जाने के बावजूद न तो पारदर्शी चुनाव कराए गए और न ही निवासियों के समक्ष कोई सार्वजनिक ऑडिट प्रस्तुत किया गया।
नरेश नौटियाल ने यह भी सवाल उठाया कि क्या कभी बिल्डर या AOA द्वारा क्वार्टरली, हाफ-ईयरली या ईयरली ऑडिट रिपोर्ट सार्वजनिक की गई, या ईमेल के माध्यम से व्यक्तिगत रूप से निवासियों को उपलब्ध कराई गई?
उन्होंने कहा कि भविष्य में जब और इमारतें जुड़ेंगी, यह यह पुरानी होंगी तब क्या यह व्यवस्था इस बोझ को संभाल पाएगी?
अंत में उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि अतिक्रमण आज हर रूप में मौजूद है—चाहे वह बिल्डर द्वारा किया गया हो, अधिकारियों की लापरवाही से हुआ हो या AOA की निष्क्रियता से। उन्होंने कहा कि व्यवस्था सुधारने के लिए केवल चर्चा नहीं, बल्कि कठोर कानून और उसका सख्त पालन आवश्यक है। जो नियम तोड़े, उसके खिलाफ तत्काल और कठोर कार्रवाई होनी चाहिए। तभी पार्किंग, आवास व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर नियंत्रण संभव है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत में भ्रष्टाचार को पूरी तरह समाप्त करना कठिन है, क्योंकि यह अब बड़े व्यापारियों, धनबल और राजनीति का हिस्सा बन चुका है, लेकिन कानून का डर और निष्पक्ष कार्रवाई ही सिस्टम सुधारने का पहला कदम हो सकती है।



