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मीडिया की चुप्पी पर सवाल

मीडिया की चुप्पी पर सवाल

Shyam Gupta Rpswa Uttar Pradesh

13 जुलाई को नोएडा में हुई सड़क दुर्घटना में एक रेहड़ी संचालक की मृत्यु हो गई और कई अन्य लोग घायल हुए। यह एक गंभीर घटना थी, लेकिन इस पर अपेक्षित स्तर पर चर्चा और कवरेज दिखाई नहीं दी। इससे आम लोगों के मन में कई सवाल उठ रहे हैं।

क्या गरीब की मौत खबर नहीं होती? क्या सड़क किनारे रोज़ी-रोटी कमाने वाले की जान की कीमत कम है? यदि यही घटना किसी बड़े व्यक्ति या चर्चित स्थान से जुड़ी होती, तो क्या मीडिया की प्रतिक्रिया अलग होती?

कुछ लोगों का यह भी दावा है कि इस घटना से संबंधित सोशल मीडिया पोस्ट या ट्वीट हटाए गए। यदि ऐसा हुआ है, तो यह जानना भी आवश्यक है कि उसके पीछे क्या कारण था। बिना ठोस प्रमाण के यह कहना उचित नहीं होगा कि किसी संस्था ने ऐसा कराया, लेकिन यदि किसी की पोस्ट हटाई गई है, तो पारदर्शिता बनी रहनी चाहिए।

हम मीडिया से आग्रह करते हैं कि वह समाज के हर वर्ग की आवाज़ बने। गरीब, मजदूर और रेहड़ी-पटरी संचालकों के जीवन से जुड़े मुद्दों को भी उतनी ही गंभीरता से उठाया जाए, जितनी अन्य महत्वपूर्ण समाचारों को दी जाती है।

लोकतंत्र में निष्पक्ष पत्रकारिता और पारदर्शिता जनता का विश्वास मजबूत करती है। यदि किसी घटना में एक गरीब नागरिक की जान जाती है, तो उस घटना की निष्पक्ष जांच, पर्याप्त मीडिया कवरेज और जवाबदेही सुनिश्चित होना भी उतना ही आवश्यक है।

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