कोरोना के जख्म अभी भरे नहीं और ग्रेटर नोएडा वेस्ट की स्वास्थ्य सेवाओं ने फिर तोड़ा दम
ग्रेटर नोएडा वेस्ट 16/02/2025
कहते हैं कि आपदा हमें सबक सिखाती है,लेकिन
ग्रेटर नोएडा वेस्ट के मामले में ऐसा प्रतीत होता है कि प्रशासन ने ‘सबक न लेने’ की कसम खा रखी है। कोरोना काल की उस भयावह तस्वीर को कौन भूल सकता है जब ऑक्सीजन और बेड के लिए हाहाकार मचा था?
महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर कुट्टू के आटे से हुए फूड पॉइजनिंग के प्रकरण ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश सरकार और गौतम बुद्ध नगर प्रशासन के दावों की पोल खोल दी है।

क्या है पूरा मामला?
महाशिवरात्रि के व्रत के दौरान Himalaya Pride सोसाइटी और आसपास के इलाकों में कुट्टू का आटा खाने से दर्जनों लोग बीमार हो गए। देखते ही देखते निजी हॉस्पिटल इमरजेंसी में 15 से 45 मरीज पहुंच गए, जबकि अन्य निजी हॉस्पिटल पर भी मरीजों का तांता लग गया। बीमारों में सांस लेने में तकलीफ, उल्टी और चक्कर आने जैसे गंभीर लक्षण देखे गए।
सिस्टम की विफलता: 45 मरीजों में ही फूल गईं सांसें
हैरानी की बात यह है कि महज कुछ दर्जन मरीजों के आने भर से इलाके के निजी अस्पताल की व्यवस्थाएं चरमरा गईं।

समाजसेवी नरेश नौटियाल ने इस पर तीखा प्रहार करते हुए कहा:
“अगर एक छोटा सा फूड पॉइजनिंग का मामला निजी अस्पतालों को पसीने ला सकता है, तो किसी बड़ी आपदा में इस लाखों की आबादी वाली ‘नया नोएडा’ का क्या होगा? यहाँ एक बड़े सरकारी अस्पताल की कमी आज फिर महसूस हुई है।”
सवाल जो जवाब मांगते हैं:
सालों से वही ढर्रा: हर नवरात्रि और शिवरात्रि पर कुट्टू के आटे से लोग बीमार होते हैं। क्या प्रशासन सिर्फ घटना होने के बाद सैंपल लेने की औपचारिकता पूरी करने के लिए है?
जनप्रतिनिधियों की चुप्पी: वोट के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले जनप्रतिनिधि आखिर ग्रेटर नोएडा वेस्ट को एक सर्वसुविधायुक्त सरकारी अस्पताल क्यों नहीं दिला पाए?
मिलावटखोरों का दुस्साहस: क्या खाद्य विभाग की शिथिलता ही मिलावटखोरों को लोगों की जान से खेलने का लाइसेंस दे रही है?
जनता की मांग और चेतावनी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि अब केवल जांच का आश्वासन काफी नहीं है। दोषियों पर ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए जो नजीर बने। साथ ही, ग्रेटर नोएडा वेस्ट में एक सुसज्जित सरकारी अस्पताल की मांग
अब ‘जरूरत’ नहीं बल्कि ‘अस्तित्व की लड़ाई’ बन गई है।
सावधान रहें: प्रशासन ने अपील की है कि संदिग्ध खाद्य सामग्री का सेवन न करें और लक्षण दिखने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लें। लेकिन सवाल वही है—सहायता मिलेगी कहां, जब सिस्टम ही बीमार है?




